हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इराक़ भेजी गई ख़ुरासान हौज़ा इल्मिया की प्रचारिका मरियम पनाही ने अरबईन के मौक़े पर महिला प्रचारिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि ज़ायरीन, विशेषकर महिलाओं, के अधिकांश प्रश्न शरई अहकाम, धार्मिक मान्यताओं और इस्लामी जीवनशैली से जुड़े होते हैं। इन प्रश्नों का आमने-सामने उत्तर देना अरबईन-ए-हुसैनी की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्रचारात्मक सेवाओं में से एक है।
मशहद में हौज़ा समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा,मैं इमाम रज़ा (अ.स.) के मौकिब में शरई मसलों, धार्मिक आस्थाओं, दीनी शंकाओं और जागरूकता संबंधी प्रश्नों के उत्तर देने की सेवा कर रही हूँ।
हमारा दायित्व है कि ज़ायरीन के अहकाम, इस्लामी जीवनशैली और यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली हर धार्मिक जिज्ञासा का समाधान करें, ताकि वे पूरी तसल्ली और मानसिक शांति के साथ इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत जारी रख सकें।
उन्होंने बताया कि अरबईन के दौरान सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न महिलाओं के विशेष शरई अहकाम से संबंधित होते हैं, जैसे पवित्रता (तहारत), यात्रा की स्थिति में नमाज़ और रोज़े के नियम तथा महिलाओं से जुड़े अन्य धार्मिक मसले। इसके अलावा मुसाफ़िर की नमाज़, क़सर और पूरी नमाज़ के नियम, इबादत में होने वाले संदेह तथा नमाज़ से संबंधित प्रश्न भी बड़ी संख्या में पूछे जाते हैं।
मरियम पनाही ने कहा कि मौकिबों में महिला तालिबात की उपस्थिति विशेष रूप से महिला ज़ायरीन के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अनेक महिलाएँ अपने निजी धार्मिक, पारिवारिक और नैतिक प्रश्न सहज वातावरण में केवल महिला प्रचारिकाओं के सामने ही रख पाती हैं। इससे उन्हें सही और विश्वसनीय मार्गदर्शन प्राप्त होता है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर पाती हैं।
उन्होंने कहा कि माताएँ भी इस अवसर का लाभ उठाकर अपने बच्चों को बचपन से ही इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रेम तथा त्याग, सेवा और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध की संस्कृति से परिचित करा सकती हैं।
मरियम पनाही ने अंत में कहा कि अरबईन आमने-सामने संवाद और धार्मिक प्रचार का एक अद्वितीय अवसर है। इस दौरान लोगों के दिल एक-दूसरे के अधिक निकट होते हैं और वे सत्य को सुनने के लिए अधिक तैयार रहते हैं।
पदयात्रा के आध्यात्मिक वातावरण में अनेक लोग बिना किसी झिझक के अपनी धार्मिक, वैचारिक और पारिवारिक समस्याएँ साझा करते हैं। यही आत्मीय संवाद अहलुल बैत (अ.) की शिक्षाओं के प्रचार तथा ज़ायरीन की धार्मिक और बौद्धिक आवश्यकताओं का सही उत्तर देने का अमूल्य अवसर प्रदान करता है।
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